❝कोशिश कर, हल निकलेगा। आज नही तो, कल निकलेगा।❞
Category : Biography
By : User image Jaimahesh Team
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24 Mar 19
Ramkrishna Pramhans Biography - रामकृष्ण परमहंस जीवनी

रामकृष्ण परमहंस जीवनी | Ramkrishna Pramhans Biography

रामकृष्ण परमहंस भारतीय संस्कृति के प्रवर्तक थे । इनका जन्म 18 फरवरी,1836 में बंगाल प्रांत स्थित कामारपुकुर गाँव में हुआ था। रामकृष्ण परमहंस के बचपन का नाम गदाधर चट्टोपाध्याय था । 19 वी सदी में रामकृष्ण परमहंस पुरे भारत में अग्रणी हिन्दू आध्यात्मिक नेताओ में से एक थे । उनके जीवन का उद्देश्य “ईश्वर की प्राप्ति” था ।

जन्म 18 फरवरी 1836
मृत्यु 16 अगस्त 1886
जन्म स्थान कोलकाता
जीवन काल 50 वर्ष
पिता खुदीराम चट्टोपाध्याय 
माता चंद्रा देवी चट्टोपाध्याय 
पत्नी शारदामणि मुखोपाध्याय
भाई रामकुमार चट्टोपाध्याय 

रामकृष्ण परमहंस का प्रारम्भिक जीवन काल

  • उनका जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था ।
  • उनके पिता  का नाम खुदीराम और माता का नाम चन्द्रा देवी चट्टोपाध्याय था ।
  • जब वह सात वर्ष के थे । तब उनके पिता का देहांत हो गया ।
  • उनके बड़े भाई रामकुमार चट्टोपाध्याय उनको अपने साथ कोलकता ले गये थें ।
  • उनके के बड़े भाई ने कोलकाता में एक संस्कृत विद्यालय शुरू किया था ।
  • इस दौरान, कोलकाता की एक अमीर महिला, रानी रश्मोनी ने दक्षिणेश्वर में एक मंदिर की स्थापना की।
  • रामकुमार वहा पर पुजारी के रूप में भी कार्य करते थें ।
  • बाद रामकुमार ने परमहंस को काली मंदिर में पुजा का कार्य सोप दिया ।
  • और वह दक्षिणेश्वर के काली मंदिर मे पुजारी बन गये ।

रामकृष्ण परमहंस जी के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

  • उनको न तो स्कुल जाने में दिलचस्पी थी और न ही व्यवसाय करने में । वह धर्म सुधारक,आध्यात्मिक गुरु और संत थे जो धर्म की सच्चाई जानना चाहते थे ।
  • बचपन से ही उनकी धार्मिक गतिविधियों विशेष में पर्याप्त रुचि थी ।
  • उनके जीवन का उद्देश्य ईश्वर की प्राप्ति थी । उनको विश्वास था की उनको ईश्वर के दर्शन जरुर होंगे ।
  • बहुत सारे धर्म सुधारक जैसे की केशव चन्द्र सेन और दयानन्द सरस्वती ने रामकृष्ण परमहंस से दिशा निर्देश प्राप्त कीए ।
  • जो भी लोग पाश्चत्य संस्कृति से प्रभावित होते थे, रामकृष्ण परमहंस उन्हें अपने धर्म और संस्कृति में विश्वास रखने का उपदेश देते थें ।
  • उनके पवित्र चरित्र और ज्ञान के प्रति समर्पण के कारण कई लोग उनकी ओर आकर्षित हुए । उन्होंने अलग-अलग तरीके से भगवान को पाने की कोशिश की ।
  • रामकृष्ण परमहंस के अनुसार सभी प्राणियों के जीवन का उद्देश्य ईश्वर के अस्तित्व की प्राप्ति होना चाहिए ।
  • रामकृष्ण छोटी छोटी कहानियों के माध्यम से लोगों को शिक्षा देते थे।
  • रामकृष्ण लोगो में राष्ट्रीयता की भावना बढ़ाना चाहते थे ।
  • उनका सबसे परम शिष्य स्वामी विवेकानन्द था । जो अपने आप में दुनिया भर में प्रसिद्ध हो गए।

रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्य

  • स्वामी विवेकानंद
  • स्वामी योगानन्द
  • स्वामी शिवानन्द
  • स्वामी कृष्णानन्द
  • स्वामी प्रेमानन्द
  • स्वामी सारदानन्द
  • केशवचंद्र सेन
  • बलराम बोष
  • दुर्गा चरण नाग 
  • विजयकृष्ण गोस्वामी
  • गिरिषचन्द्र घोष
  • सुरेद्रनाथ
  • ईश्वरचंद्र विद्यासागर मित्र इनके मुख्य शिष्य थें ।

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